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धान के फ़सल का रोगों और हानिकारक कीटों से बचाव

रोगों और हानिकारक कीटों जीवों का एकीकृत प्रबन्ध

1. सामान्य सावधानियां

  • विषिष्ट क्षेत्रों के लिए प्रतिरोधी और सु-अनुकूलित प्रजातियों का चुनाव कीजिए।
  • स्वच्छ एवं रोगमुक्त बीजों का चुनाव कीजिए।
  • समुचित सस्यीय क्रियाएं, जैसे अनुकूलतम बोआई/रोपाई समय एवं पौद अवस्था, रोपाई ज्यामिति, रोपाई की गहराई आदि।
  • अच्छा जल प्रबंध, उदाहरणार्थ, कीटों एवं रोगो के आक्रमण के समय पर खेत से जल निकाल दीजिए।

2.  खेत की तैयारी :

  • ट्राइकोडर्मा हर्जिएनम या स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स से पूर्व कालोनिकृत गोबर की खाद का प्रयोग कीजिए। गोबर की खाद की के पूर्व-कॉलोनीकरण के लिए गोबर की खाद के गढ्ढे में मासिक अंतराल पर ट्राइकोडर्मा हर्जिएनम/स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स या 1.0 कि0 ग्रा0/गङ्ढा की दर से पंत बायो-एजेन्ट मिलाया जाता हैं। इन गङ्ढों को गले की पत्तियों या धान के पुआल से ढक देना चाहिए। नियमित अंतरालों पर बायो-एजेन्ट प्रयोग के बाद कम से कम एक बार और आर्दता बानाए रखने के लिए गोबर की खाद के प्रयोग से 15 एवं 7 दिन पहले जल का छिड़काव करना चाहिए।
  • हरी खाद फसलों की बोआई करनी चाहिए। हरी खाद फसल के मिट्टी में मिलाने के ठीक समय पर 5 ग्राम प्रत्येक/लीटर जल की दर से ट्राइकोडर्मा हर्जिएनम एवं स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स का छिड़काव कीजिए।

3.   नर्सरी बोआई के समय पर :

  • नमक मिले जल से बीजोपचार के बाद 5 ग्राम प्रत्येक/कि0ग्रा0 बीज की दर से ट्राइकोडर्मा हार्जिएनम एवं स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स या 10 ग्राम/कि0ग्रा0 बीज की दर से पन्त बॉयो एजेन्ट-3 से बीजोपचार करें।
  • स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स (10 ग्राम प्रति किग्राबीज) से बीज बायो-प्राइमिंग (जैव अस्तरित करना)
  • तनावेधक के लिए प्रति 100 वर्गमीटर नर्सरी क्षेत्र के लिए एक फीरोमोन ट्रैप (पाष) का प्रयोग कीजिए।
  • 150000 पर जी व्याम/है0 की दर से ट्राइकोगैमा जैवोनिकम या ट्रा चिलोनिस छोड़िए।

4.  रोपाई के दौरान :

  • पौध उखाड़ने के एक दिन पहले नर्सरी मृदा को स्यूडोमोनास फ्लुओरेन्स (1 ग्राम/वर्ग मीटर) से तर-बतर करना या स्यू फ्लुओंरेसेन्स (ग्रा0/ली) के निलंबन में पौधों की जड़ों को डुबोना।
  • जीवाणुज अंगमारी से बचने के लिए पूरी या आंशिक छाया में रोपाई से बचिए। छाया में एक बार जीवाणुज अंगमारी का आक्रमण हो जाने पर षेष खेत के लिए वह निवेषद्रव्य का स्रोत बन जाता है।

5.  रोपाई के बाद परिपक्कता तक :

  • तना वेधक के नियंत्रण के लिए धान की रोपाई के एक सप्ताह के भीतर फीरोमोन ट्रैप (5 मि0 ग्रा0 फीरोमान प्रति ट्रैप; 20 ट्रैप प्रति हैक्टेयर; 20X25 मीटर दूरी) का प्रयोग कीजिए और इसके 30 दिन बाद प्रलोभक (चारा) बदल लीजिए। नर्सरी में और फसल की प्रारम्भिक अवस्था में 50 सेमी0 पर ट्रैप की ऊँचाई बनाए रखिए। जैसे-जैसे पौधे बढ़ते जाते है, ट्रैपों की ऊँचाई बढ़ाते रहना चाहिए जिससे कि वे सदैव फसल वितान (कैनोपी) के लगभग 30 सेमी0 मी0 ऊपर बने रहें।
  • जल खड़ा रहने मत दीजिए और कीट एंव रोग के आक्रमण के समय पर खेत से जल निकाल देना चाहिए।
  • प्रयोग के एक सप्ताह पहले नीम की पत्तियों के साथ मिश्रित 10% गोमूत्र का छिड़काव कीजिए। गोमूत्र का छिड़काव रोपाई के 25 दिन के बाद प्रारम्भ करना चाहिए और उसके बाद 15 दिन के अंतर पर 3-4 छिड़काव करना चाहिए।
  • ट्राइकोडर्मा हर्जिएनम एवं स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स से उपचारित 5% वर्मीवाश/कम्पोस्ट टी का छिड़काव व कीजिए।
  • पर्णच्छद अंगमारी, पर्णच्छद विगलन एंव ग्रीवा प्रध्वंस के नियंत्रण के लिए पुष्पगुच्छ शुरूआत पर स्यूडोमोनास फ्लुओंरेसेन्स एवं ट्राइकोडर्मा हर्जिएनम 65 ग्राम प्रत्येक प्रतिलीटर जल के सुसंगत विभेदों (स्ट्रेनों) या पंत बायो एजेन्ट-3 (10 ग्राम/ली0) के मिश्रित सूत्रण का छिड़काव कीजिए। साप्ताहिक अंतर पर एक या दो छिडकाव किया जाता है।

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