पशुपालन

बकरी पालन में महिनेवार क्रियाएं

जनवरी भेड, बकरियों को तेज सर्दी से बचाकर रखें तथा भेड़ बकरियों को कृमिनाशक दवाऐं दें तथा मादा भेड़ों से अच्छी ऊन प्राप्त करने के लिए अच्छी नस्ल के नर भेड़ों से मिलाएं। तुरन्त ब्याही हुई भैसों को एक सप्ताह तक नहीं नहलाना चाहिये। ब्याने के 1-2 घंटे के अन्तराल पर ही बच्चे को खीस अवश्य पिलाना चाहिये। ब्याही हुई भैस/गाय को हरीरा गुड़ 500 ग्राम, अजवाइन 100 ग्राम, मैंथी 100 ग्राम, जीरा 50 ग्राम, सौठ 50 ग्राम, हल्दी 20 ग्राम इत्यादि को 250 ग्राम सरसों के तेल में पकाकर खिलाना चाहिये यह खुराक ब्याही हुई भैंस को एक दिन में खिलाये इस प्रकार खुराक बनाकर 3-4 दिन तक दें। फरवरी भेड, बकरियों को पशु चिकित्सक की सलाह में कृमिनाशक दवा पिलाये तथा मादा भेड़ों से अधिक ऊन के लिए अच्छी नस्ल के नर भेड़ों से मिलायें। अफारा के बचाव हेतु साबुत बरसीम न खिलायें उसको चैफ कटर से काटकर भूसे में मिलाकर खिलायें। गाय, भैंस के बच्चों को 15 दिन की उम्र में पेट के कीड़े की दवाई अवश्य पिलायं,इसके बाद 20 दिन के अन्तराल पर दूबारा पिलाते रहें जब तक बच्चा चारा खाना शुरु नहीं करता। मार्च बाहृय परजीवी (किलनी व जूँ) के बचाव के लिए किलनी व…

बकरी पालन : एक संक्षिप्त विवरण

बकरी पालन-एक परिचय बकरी पालन प्रायः सभी जलवायु में कम लागत, साधारण आवास, सामान्य रख-रखाव तथा पालन-पोषण के साथ संभव है। इसके उत्पाद की बिक्री हेतु बाजार सर्वत्र उपलब्ध है। इन्हीं कारणों से पशुधन में बकरी का एक विशेष स्थान है। उपरोक्त गुणों के आधार पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी बकरी को ‘गरीब की गाय’ कहा करते थे। आज के परिवेश में भी यह कथन महत्वपूर्ण है। आज जब एक ओर पशुओं के चारे-दाने एवं दवाई महँगी होने से पशुपालन आर्थिक दृष्टि से कम लाभकारी हो रहा है वहीं बकरी पालन कम लागत एवं सामान्य देख-रेख में गरीब किसानों एवं खेतिहर मजदूरों के जीविकोपार्जन का एक साधन बन रहा है। इतना ही नहीं इससे होने वाली आय समाज के आर्थिक रूप से सम्पन्न लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। बकरी पालन स्वरोजगार का एक प्रबल साधन बन रहा है। बकरी पालन की उपयोगिता बकरी पालन मुख्य रूप से मांस, दूध एवं रोंआ (पसमीना एवं मोहेर) के लिए किया जा सकता है। झारखंड राज्य के लिए बकरी पालन मुख्य रूप से मांस उत्पादन हेतु एक अच्छा व्यवसाय का रूप ले सकती है। इस क्षेत्र में पायी जाने वाली बकरियाँ अल्प आयु में वयस्क होकर दो वर्ष में कम से…
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