कृषि प्रबंधन

बीज सम्बंधित सूचनाओं के ऊपर एक संक्षिप्त प्रश्नोत्तेरी

  1- प्रश्न- उत्तम कोटि का बीज क्या है। उत्तर- अनुवॉंशिक रूप से शतप्रतिशत शुद्ध बीज को उत्तम बीज कहते है। 2- प्रश्न- बुवाई के लिए कौन से बीज का प्रयोग करें। उत्तर- प्रमाणित बीज बुवाई के लिए उपयुक्त होता है। किसान भाई आधारीय बीज-1 एवं आधारीय बीज-2 से भी अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। 3- प्रश्न- बीज शोधन कैसे करें तथा क्या लाभ है। उत्तर- प्रमाणित बीज शोधित बीज होता है, किन्तु जिन बीजों का शोधन नहीं हुआ हो उन्हें थीरम अथवा कार्बेन्डाजिम से शोधित करें, जिससे बीमारियों एवं रोगों से मुक्ति मिल सके। 4- प्रश्न- बीज उत्पादन में रोगिंग क्या है। उत्तर- बीज उत्पादन की प्रक्रिया में नियत प्रजाति के उत्पादन में अन्य प्र्रजाति के पौधे को उखाड़कर खेत से बाहर करना रोगिंग कहलाता है, जिससे बीज/प्रजाति की शुद्धता बनी रहती है। 5- प्रश्न- क्या कई प्रकार के बीज होते है। उत्तर- जी हॉं मुख्यतया चार प्रकार के बीज होते है। 1. प्रजनक बीज, 2. आधारीय बीज, 3. प्रमाणित बीज 4. सत्यापित बीज। 6- प्रश्न- बीजों की गुणवत्ता कहॉं जॉंची जाती है। उत्तर- प्रदेश में 07 बीज विश्लेषण केन्द्र है जहॉं से बीजों की गुणवत्ता की जॉंच की जाती है। वाराणसी, आजमगढ़, बाराबंकी, हरदोई, मथुरा, मेरठ तथा…

मृदा संबाधित जानकारियों पर आधारित प्रश्नोत्तेरी – जाने आपने मिट्टी को और भी बेहतर

  1- प्रश्न- विगत कई वर्षो से धान-गेहूँ की खेती कर रहा हूँ। अनुभव में आ रहा है कि गेहूँ की उपज कम होती जा रही है। उत्तर- धान गेहूँ का फसल चक्र अधिक पोषक तत्व की मॉंग करता है। जिससे भूमि कमजोर हो जाती है। इसलिए गेहूँ की उपज कम हो रही है। अतः गेहूँ की कटाई के बाद तथा धान की रोपाई के पहले खेतों में हरी खाद का प्रयोग तथा औसतन 10 कुन्तल गोबर की खाद का प्रयोग करें। 2- प्रश्न- खेत बंजर की स्थिति में है कई वर्षो से कुछ भी नहीं होता है क्या करें। उत्तर- कृषि वानिकी अपनाएं। औषधीय पौधों की खेती कर सकते है। सरकार की तरफ से औषधीय खती पर प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत प्रशिक्षण भी दिया जाता है। 3- प्रश्न- खेत का रकबा कम है गुजर बसर नहीं हो पाता क्या करें। उत्तर- कृषि उद्यमिता अपनाएं। वर्मी कम्पोस्ट/नाडेप कम्पोस्ट तैयार कर बिक्री कर सकते है बहुंत मॉंग है। औद्यानिक एक सफल रास्ता है। उसे अपनाएं। 4- प्रश्न- हमारे जिले में आत्मा चल रही है। इससे कैसे लाभ पायें। उत्तर- अच्छी बात है कि आपको आत्मा की जानकारी है। आत्मा की परियोजनाओं पर जनपद के सभी किसानों का…

तमाम प्रकार के उर्वरक और उनके उपयोग पर आधारित एक प्रश्नोत्तेरी

  1- प्रश्न- जैव उर्वरक क्या है ? उत्तर- कल्चर ही जैव उर्वरक है। यह जीवित सूक्ष्म जीवाणुओं से बना हुआ एक प्रकार का टीका है जैसे राइजोबियम, पी0एस0बी0 तथा एजैटोबैक्टर। 2- प्रश्न- पोटाश की खाद (म्यूरेट आफ पोटाश) का प्रयोग कब और कैसे करें ? उत्तर- हल्की मृदा में (बलुअर, बलुअर दोमट) में पोटाश का प्रयोग दो या तीन बार में लाभदायी होता है, क्योंकि हल्की मृदा में पोटाश पानी में घुलकर जड़ों के काफी नीचे चला जाता है। 3- प्रश्न- विभिन्न प्रकार की खाद एवं उर्वरक मौजूद है इन सबके प्रयोग का समय बतायें ? उत्तर- हरी खाद बुवाई से डेढ़ माह पूर्व, कम्पोस्ट/वर्मी बुवाई से एक माह पहले खेत में भली भॉंति मिला देना चाहिए। उर्वरकों (नत्रजनधारी, फास्फेटिक एवं पोटाश) का प्रयोग बुवाई के समय इस प्रकार करना चाहिए कि नत्रजनधारी की आधी मात्रा फास्फेट एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय खेत में डाले तथा नत्रजन की शेष आधी मात्रा टाप ड्रेसिंग के रूप में खड़ी फसल में डाले। सूक्ष्म पोषक तत्वों वाली उर्वरक का प्रयोग मिट्टी जॉंच के आधार पर बुवाई के समय खेत में डालना चाहिए। 4- प्रश्न- धान के खेतों में नील हरित शैवाल के प्रयोग से क्या लाभ है ? उत्तर-…

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मृदा जाँच केंद्र 

  क्रमांक प्रयोगशाला 1 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, मेरठ 2 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला लख्ननऊ 3 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, आजमगढ 4 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, सहारनपुर 5 जनपदीय प्रयोगशाला,मऊ 6 जनपदीय प्रयोगशाला,बलिया 7 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, अलीगढ 8 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, इलाहाबाद 9 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, फैज़ाबाद 10 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, वाराणसी 11 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, गोरखपुर 12 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, आगरा 13 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, बरेली 14 जनपदीय प्रयोगशाला सीतापुर 15 जनपदीय प्रयोगशाला हरदोई 16 NFL Barabanki 17 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला, मुरादाबाद 18 क्षेत्रीय भूमिपरीक्षण प्रयोगशाला,कानपुर 19 जनपदीय प्रयोगशाला राया मथुरा 20 जनपदीय प्रयोगशाला उन्नाव 21 जनपदीय प्रयोगशाला लखीमपुर खीरी 22 जनपदीय प्रयोगशाला आगरा 23 जनपदीय प्रयोगशाला इलाहाबाद 24 जनपदीय प्रयोगशाला एटा 25 जनपदीय प्रयोगशाला गाजियाबाद 26 जनपदीय प्रयोगशाला गाजीपुर 27 जनपदीय प्रयोगशाला गोण्डा 28 जनपदीय प्रयोगशाला गोरखपुर 29 जनपदीय प्रयोगशाला गौतमबुद्धनगर 30 जनपदीय प्रयोगशाला जालौन 31 जनपदीय प्रयोगशाला बरेली 32 जनपदीय प्रयोगशाला बुलन्दशहर 33 जनपदीय प्रयोगशाला बस्ती 34 जनपदीय प्रयोगशाला बागपत 35 जनपदीय प्रयोगशाला बांदा 36 जनपदीय प्रयोगशाला हामिरपुर 37 जनपदीय प्रयोगशाला मैनपुरी

कृषि रक्षा रसायनों सूची

कृषि रक्षा रसायनों सूची वर्ग रसायन कीटनाशक तरल प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत ई.सी. डाइमिथोएट 30 ई.सी. फास्फामिडान 40 प्रतिशत एस.एल. डाइक्लोरोवास 76 ई.सी. मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल. मैलाथियान 50 ई.सी. क्यूनालफास 25 ई.सी. क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. ग्लाइकोसेट 41 प्रतिशत एस.एल. इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल. प्रेटिलाक्लोर 50 प्रतिशत ई.सी. फास्फामिडान 40 प्रतिशत एस.एल. लिण्डेन 20 ई.सी. डाइमिथोएट 30 ई.सी. क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. क्यूनालफास 25 ई.सी. मिथाइल पैराथियान 50 ई.सी. इन्डोसल्फान 35 ई.सी. मैलाथियान 50 ई.सी. लिण्डेन 20 ई.सी. कीटनाशक धूल/ ग्रेन्यूल कारटापहाइड्रोक्लोराइड 4 जी फोरेट 10 जी मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल कारटापहाइड्रोक्लोराइड 4 जी कारबोफ्यूरान 3 जी फोरेट 10 जी मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत धूल कार्बराइल+लिण्डेन 4:4 जी मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल कारटापहाइड्रोक्लोराइड 4 जी लिण्डेन 6 जी कारबोफ्यूरान 3 जी फेनवैलरेट 0.4 प्रतिशत धूल फोरेट 10 जी मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत धूल मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल कारटापहाइड्रोक्लोराइड 4 जी फोरेट 10 जी कारटापहाइड्रोक्लोराइड 4 जी मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल चूहानाशक/ धूम्रक जिंक फास्फाइड 80 प्रतिशत धूल एल्यूमिनियम फास्फाइड 56 प्रतिशत पाउडर पाउच जिंक फास्फाइड 80 प्रतिशत धूल तृणनाशक ग्लाईफोसेट 41 प्रतिशत एस.एल. सल्फोसल्फ्युरान 75 प्रतिशत डब्ल्यू. जी. पेन्डामेथलीन 30 ई.सी. आइसोप्रोट्यूरान 75 प्रतिशत डब्लू.पी. एनीलोफास 30 ई.सी. ब्यूटाक्लोर 50 प्रतिशत ई.सी. 2,4 डी (सोडियम…

नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की पहचान कैसे करें

नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की पहचान खेती में प्रयोग में लाए जाने वाले कृषि निवेशों में सबसे मंहगी सामग्री रासायनिक उर्वरक है। उर्वरकों के शीर्ष उपयोग की अवधि हेतु खरीफ एवं रबी के पूर्व उर्वरक विर्निमाता फैक्ट्रियों तथा विक्रेताओं द्वारा नकली एवं मिलावटी उर्वरक बनाने एवं बाजार में उतारने की कोशिश होती है। इसका सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ता है। नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की समस्या से निपटने के लिए यद्यपि सरकार प्रतिबद्ध है फिर भी यह आवश्यक है कि खरीददारी करते समय किसान भाई उर्वरकों की शुद्धता मोटे तैार पर उसी तरह से परख लें, जैसे बीजों की शुद्धता बीज को दांतों से दबाने पर कट्ट और किच्च की आवाज से कपड़े की गुणवत्ता उसे छूकर या मसलकर तथा दूध की शुद्धता की जांच उसे अंगुली से टपकाकर कर लेते हैं। कृषकों के बीज प्रचलित उर्वरकों में से प्रायः डी०ए०पी०, जिंक सल्फेट, यूरिया तथा एम०ओ०पी० नकली/मिलावटी रूप में बाजार में उतारे जाते हैं। खरीदारी करते समय कृषक इसकी प्रथम दृष्टया परख निम्न सरल विधि से कर सकते हैं और प्रथम दृष्टया उर्वरक नकली पाया जाए तो इसकी पुष्टि किसान सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध टेस्टिंग किट से की जा सकती है। टेस्टिंग किट किसान सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध कराए जा…

उत्तर प्रदेश के प्रमुख कृषि शिक्षा संस्थान

These are some good Agriculture Institutes of Uttar Pradesh India. Sardar Vallabh Bhai Patel University of Agriculture and Technology, Meerut, Uttar Pradesh  Affiliated with ICAR      http://www.svbpmeerut.ac.in/ Chandra Bhanu Gupt  Krishi Mahavidyala,  Lucknow, Uttar Pradesh  Affiliated With NCTE      http://cbgagcollege.org/ Amity Institute of Organic Agriculture, Noida, Uttar Pradesh  Affiliated with AICTE     http://www.amity.edu/aioa/ Chandra Shekhar Azad University Of Agriculture And Technology, Kanpur, Uttar Pradesh  Affiliated with ICAR      http://csauk.ac.in/ Kisan Post Graduate College, Bahraich, Uttar Pradesh  Affiliated With NAAC      http://www.kisanpgcollege.ac.in/ Banaras Hindu University – [BHU] Varanasi, Uttar Pradesh  Affiliated With NAAC      http://www.bhu.ac.in Amity School Of Natural Resources And Sustainable Development, Noida, Uttar Pradesh  Affiliated With COA, BCI, AICTE      http://www.amity.edu/asnrsd/ Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University – [DDU], Gorakhpur      http://ddugorakhpuruniversity.in/ Narendra Dev University of Agriculture And Technology – [NDUAT], Faizabad     http://www.nduat.org/ Indian Grassland and Fodder Research Institute -[IGFRI], Jhansi, Uttar Pradesh     http://www.igfri.res.in/ Chaudhary Charan Singh University – [CCSU], Meerut      http://www.ccsuniversity.ac.in Aligarh Muslim University – [AMU], Aligarh     https://www.amu.ac.in/ Bundelkhand University, Jhansi     https://www.bujhansi.ac.in Invertis University, Bareilly     http://www.invertisuniversity.ac.in/ Shobhit University, Meerut     http://www.shobhituniversity.ac.in/ Teerthanker Mahaveer University – [TMU], Moradabad     http://tmu.ac.in/ Udai Pratap College, Varanasi  …

खेत की तैयारी में इंधन की बचत करने के उपाय

खेती में खनिज तेल की बहुत ज्यादा खपत है. तेल के दाम दिन प्रतिदिन बढते ही जा रहे है अतः यह आवश्यक हो गया है की इनका उपयोग किफ़ायत के साथ किया जाए. किसान भाइयो को ट्रेक्टर और इंजनों में डीजल की खपत कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. ये बातें निम्न हैं: प्रत्येक ट्रेक्टर और इंजन का निर्माता नए मशीन के साथ निर्देश पुस्तिका देता है. मशीनों के उपयोग करने से पहले उसकी निर्देश पुस्तिका को ध्यान से पढ़ें और उसमे लिखी सलाह के अनुसार ही मशीन का प्रयोग करें. इंजन चालू करने पर यदि टैपित का शोर सुनाई  पड़ता है तो इसका मतलब है इंजन में हवा कम जा रही है जिसके कारण डीजल की खपत बढ़ जाएगी .इसलिए टैपित से आवाज़ आने पर उसे फिर से बंधवाना चाहिए. इंजन से काला धुआं निकलने का मतलब है ज्यादा डीजल खर्च हो रहा है. इंजेक्टर या इन्जेक्सन पम्प की कोई खराबी इसका कारण हो सकती है. अतः ट्रैक्टरों में ६०० घंटे प्रयोग के बाद इंजेक्टर की जाँच करवा कर उसे फिर से बन्धवाएँ. इंजन से कम लेना शुरू करने पर कुछ काला धुआं निकलता है पर यह जल्दी ही स्वयं साफ हो जाता है. यदि…

अम्लीय मिट्टी का प्रबंधन

परिचय यदि भूमिका पी एच 5.5 से नीचे हो अधिक पैदावार हेतु प्रबन्धन आवश्यकता होती है| हिमाचल प्रदेश  में लगभग  1 लाख हैक्टेयर कृषि योग्य भूमि  की पी एच 5.5 से नीचे है| अम्लीय भूमि से पैदावार लेने के लिए अम्लीयता को उदासीन करना तथा विभिन्न पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढ़ाना आवश्यक होता है| इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मृदा में चूने का प्रयोग किया जाता है जो पैदावार वृद्धि में भी सहायक होता है| बाजार में मिलने वाले चुने का प्रयोग बगीचों तथा खेतों में किया जाता है| इसके अलावा बेसिक स्लैग, ब्लास्ट फर्नेस स्लैग, पेपर मिल से प्राप्त लाइम स्लज, चीनी मिल के कर्बोनेशन प्लांट से प्राप्त प्रेस मड और चूना पत्थर जैसे औद्योगिक बेकार पदार्थों का प्रयोग भी लाभकर सिद्ध होता है| अम्लीय मिट्टियों में जिंक के प्रयोग से फसलोत्पादन में सार्थक वृद्धि देखी गई है| मिट्टी में जिंक की कमी होने पर, जिक सल्फेट 25 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर करने के लिए सोडियम मोलिबडेट 250-500 ग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से डालने की सिफारिश की जाती अहि| पर्णीय छिड़काव (0.05 से 0.1% सांद्रता के घोल) द्वारा भी मोलिबडेनम की की कमी दूर की जा सकती है| हल्के गठन वाली अम्लीय मिट्टियों में बोरोन…

रासायनिक उर्वरक एवं उसमे पाए जाने वाले तत्व एवं प्रतिशत

  १)  पोटैशियम क्लोराइड या मूरत ऑफ पोटाश -६०% पोटाश   २) पोटैशियम सल्फेट- ५०% पोटाश व् १८% गंधक   ३) जिप्सम -१३% गंधक   ४) पाइरइट- १८-२२% गंधक   ५) गंधक-८५-१००% गंधक   ६) मैग्नीशियम सल्फेट-१६% मैग्नीशियम व् १३% सल्फेट   ७) यूरिया-४६% नाइट्रोजन   ८) अमोनियम सल्फेट-२०.६% नाइट्रोजन व् २४% सल्फेट   ९) अमोनियम क्लोराइड-२६% नाइट्रोजन   १०) कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट-२५% नाइट्रोजन   ११) डाई अमोनियम फाश्फेट-१८% नाइट्रोजन व् ४६% फाश्फोरस   १२) सिंगल सुपर फश्फेट-१४-१६% फाश्फोरस, १२% गंधक व् २१% कैल्शियम   १३) अमोनियम फाश्फेट सल्फेट-१६-२०% नाइट्रोजन, २०% फाश्फोरस व् १२% गंधक   १४) यूरिया अमोनियम फाश्फेट-२८% नाइट्रोजन व् २८% फाश्फोरस
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