गन्ना

उत्तर भारत में खेती के लिए उपयुक्त गन्ने की किस्में

उत्तर भारत में खेती के लिए उपयुक्त गन्ने की किस्में

गन्ने की किस्में High Yeild (Improved) Varieties of Sugarcane for different Districts of Uttar Pradesh and Northern parts of India SN Name of Area District (s) Early Maturing Varieties Mid-late Maturing Varieties 1 – All UP All Cane Growing Districts of State CoS 8436, CoS 88230, CoS 95255, CoS 96268, CoSe 03234 UP 05125, CoSe 98231 CoSe 95422, Co 0238, Co 0118, Co 98014, CoS 13231 CoS 767, CoS 8432, CoS 97264, CoS 96275, CoS 97261, CoS 98259, CoS 99259, CoSe 01434, UP 0097, CoS 08279, CoS 08276, CoS 12232, CoSe 11453, Co 05011, CoS 09232 2- Western UP Meerut and Saharanpur regions. Meerut, Ghaziabad, Hapur, Bulandshahar, Baghpat, Saharanpur, Muzaffarnagar(, Shamli alongwith approved varieties for all areas of UP, CoJ 64, CoS 03251, CoLk 9709, Co 0237, Co 0239, Co 05009, CoPK 05191 alongwith approved varieties for all areas of UP, CoS 94257, CoS 96269, UP 39, Co Pant 84212, CoS 07250, CoH 119, Co Pant 97222, CoJ 20193, Co 0124, CoH 128 3- Central UP Lucknow, Bareilly and Moradabad regions. Lucknow,Lakhimpur, Sitapur,Hardoi,Raebareily,Kanpur, Kanpur-Dehat, Farukhabad, Unnao, Bareilly,Pilibhit,Shahjahanpur, Badaun, Aligarh, Etah, Mathura, Moradabad, Sambhal, Amroha, Rampur and Bijnor. alongwith approved varieties for all areas of UP, CoJ 64, CoSe 01235, CoLk…
गन्ने की उन्नत किस्मों की खेती और बेहतर पैदावार के तरीके

गन्ने की उन्नत किस्मों की खेती और बेहतर पैदावार के तरीके

हमारे देश में गन्ना प्रमुख रूप से नकदी फसल के रूप में उगाया जाता है, जिसकी खेती प्रति वर्ष लगभग 30 लाख हेक्टर भूमि में की जाती है, इस देश में औसत उपज 65.4 टन प्रति हेक्टर है, जो की काफी कम है, यहाँ पर मुख्य रूप से गन्ना द्वारा ही चीनी व गुड बनाया जाता है। —– गन्ना उत्पादन में समस्याएं —– गन्ना उत्पादन की निम्न मुख्य समस्याएं है। 1. क्षेत्र अनुसार अनुशंसित किस्मो का उपयोग न करना व पुरानी जातियों पर निर्भर रहना। 2. रोगरोधी और क्षेत्र अनुसार उपयुक्त किस्मों के उन्नत बीजों की अनुपलब्धता एवं बीजो उत्पादन कार्यक्रम का अभाव। 3.  बीज उपचार न करने से बीज जनित रोगों व कीड़ों का प्रकोप अधिक एवं एकीकृत पौध संरक्षण उपायों को न अपनाना। 4. कतार से कतार कम दूरी व अंतरवर्तीय फसलें न लेने से प्रति हेक्टेयर उपज और आय में कमी। 5. पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग नहीं किया जाना। 6. उचित जल निकास एवं सिंचाई प्रबंधन का अभाव। 7. गन्ना फसल के लिए उपयोगी कृषि यंत्रों का अभाव जिसके कारण श्रम लागत अधिक होना। —— जलवायु और भूमि —— गन्ने की बुवाई के समय 30-35 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान होना चाहिए, साथ ही वातावरण शुष्क होने पर…
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