लाइफस्टाइल

डायबिटीज – आहार सम्बंधित ९ प्रमुख बातें

डायबिटीज में कैसा डाइट लेना चाहिए ? आज भारत में हर चार में से एक व्यक्ति को डायबिटीज / मधुमेह हैं। लगभग 25 % भारतीय डायबिटीज से पीड़ित हैं। डायबिटीज के इतने रोगी होने के बाद भी भारत में डायबिटीज के प्रति जागरूकता निर्माण नहीं हुई हैं। आज भी ज्यादातर युवा वर्ग के लोग न तो कोई व्यायाम करते है और नाही आहार में कोई विशेष सावधानी बरतते हैं। डायबिटीज से पीड़ित लोग स्वस्थ खानपान और जीवन भर हेल्थी डाइट योजना पर अमल कर ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। डायबिटीज को रोकने और नियंत्रित करने के लिए कदम उठाते हुए आहार अभाव का कष्ट सहन करने की जरूरत नहीं है, नाही आपको मिठाई को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत है, बल्कि जीवन भर हेल्दी डाइट लेना महत्वपूर्ण है।फाइबर से उच्च और शुगर और फैट में कम और दिल के लिए स्वस्थ आहार डायबिटीज प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण होता है। डायबिटीज से पीड़ित लोग स्वस्थ खानपान और दैनिक आहार योजना बनाकर शुगर के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। डायबिटीज के रोगियों ने कैसा आहार लेना चाहिए इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं डायबिटीज के रोगियों को कैसा डाइट लेना चाहिए? डायबिटीज को नियंत्रण करने के लिए…

स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है गुनगुने पानी में निम्बू और शहद का रोजाना सेवन

स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है गुनगुने पानी में निम्बू और शहद लगभग सभी लोगो ने यह सुन रखा है की रोज सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में निम्बू और शहद मिलाकर पिना हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। यह मिश्रण पिने से हमारे शरीर की सफाई होती है, पाचन प्रणाली मजबूत होती है और साथ ही वजन कम  करने में भी मदद मिलती है। नींबू पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है सिवाय उनके जिन्हें नींबू से एलर्जी होती है। यह खराब गले,कब्ज,किडनी स्टोन, और मसूड़ों की समस्याओं में राहत पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर और तनाव को कम करता है। त्वचा को स्वस्थ बनाने के साथ ही लिवर के लिए भी यह बेहतर होता है। पाचन क्रिया,वजन संतुलित करने और कई तरह के कैंसर से बचाव करने में नींबू पानी मददगार होता है। नींबू पानी में कई तरह के मिनरल्स जैसे आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम और जिंक पाए जाते हैं। कई लोग इस अद्भुत मिश्रण का वर्षो से उपयोग कर रहे है और इससे मिलनेवाले फायदे का लाभ उठा रहे हैं। रोज सुबह बेड टी पिने की जगह यह मिश्रण पीना आपके शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं। मुख शुद्धि कई लोग मुख की दुर्गन्द से…

नीम्बू के ३० बेहतरीन स्वास्थ्यकारी फायदे

नींबू के स्वास्थ्यकारी लाभ व फायदे नींबू का प्रयोग सलाद में या फिर सब्जियों का टेस्ट बढ़ाने के लिए किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं। नींबू बेहद फायदेमंद और गुणकारी हैं। नींबू के प्रयोग से आप न‍ सिर्फ अपना सौंदर्य निखार सकते हैं, बल्कि यह आपको फिट और स्‍वस्‍थ रखने के लिए भी लाभकारी है। यानी नींबू एक, लाभ अनेक। आइए जानें नींबू से होने वाले लाभों के बारे में  नीबू के जूस से शरीर की रोग-प्रतिरोधी क्षमता मजबूत होती है लेकिन इससे मोटापा नहीं बढ़ता है। इसके सेवन से आप बिना कमजोरी के वजन घटा लेंगे। यह न सिर्फ पतला करने बल्कि मोटापा बढ़ाने में भी लाभकारी है। वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो रोज नीबू में एक चम्मच शक्कर मिलाकर उसका जूस पीयें।   नींबू बालों के लिए भी काफी अच्छा होता है, बालों में लगाने पर बालों पर ऱूसी का असर नहीं होता है।   नींबू में साइट्रिक एसिड होता है, और इसमें में विटामिन सी पाया जाता है, जो हडि़डयों को मजबूती देने के लिए किफायती है।   सौंदर्य निखारने यानी चेहरे पर कच्चे दूध में नीबू का रस मिला कर लगाने से चेहरे के सारे दाग मिट जाते हैं।   कोहनी पर नींबू के…

प्रकृति का चमत्कार है नीम – नीम के फायदे

नीम के फायदे नीम – प्रकृति का चमत्कार अन्य लेख की भातिं यह लेख नीम तथा उसके स्वास्थ्य लाभों पर आधारित है। नीम भारतीय मूल का सदबहार पेड़ है। नीम के बहुत सारे फायदे है। नीम के फायदे अनगिनत हैं। नीम का पेड़ तथा इसके हिस्से कई तरह के बीमारी उपयोगी हैं। नीम के पत्ते के रस में बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की क्षमता होती है। नीम के पेड़ को आयुर्वेदिक वृक्ष या नीम के पेड़ का हर हिस्सा उपयोगी है- चाहे नीम के पत्ते हो, नीम के पेड़ की छाल हो, तने हो, या फिर जड़। नीम है तो बहुत ही उपयोगी, परन्तु इसका स्वाद बहुत ही कड़वा होता है। नीम का आयुर्वेद में खास स्थान है। आयुर्वेद में इस्तेमाल करीब 4000 साल से भी पहले से हो रहा है। चमत्कारी वृक्ष भी कह सकते है। नीम के तमाम फायदे: आपको स्किन (त्वचा) सम्बन्धी बीमारी हो या मलेरिया हो। आप नीम की छाल का प्रोयोग कर सकते है।मुंह के छाले, मुहासे, खुजली, मधुमेह, ह्रदय रोग, कैंसर, एलर्जी और पीलिया इस्त्यादी जैसे बीमारी में नीम का उपयोग करना लाभकारी साबित होता है। नीम (Neem) से कीड़े मरते है, इसलिए नीम के पत्ते को कपडे और अनाज में रखना चाहिए। नीम…

त्वचा के रंग नीम के संग

त्वचा के रंग नीम के संग नीम ४००० वर्ष से आयुर्वेद में एक चमत्कारी पौधे के रूप में जाना जाता रहा है। इसमें कई गुण काफी प्रभावी रूप से शरीर की विभिन्न समस्याओं का इलाज करते हैं। नीम के फायदे अनेक हैं और यह बात भी सर्वविदित है कि नीम के पेड़ का प्रत्येक अंग एक औषधि होता है. नीम का प्रयोग सौन्दर्य और त्वचा की देखभाल के लिए किया जाना भारत में कोई नयी बात नहीं है। इसका प्रयोग लम्बे समय से त्वचा के अवगुणों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। त्वचा सम्बन्धी अनेक समस्याओं को नीम के द्वारा ठीक किया जा सकता है. नीम के रस से त्वचा और बालों से जुडी समस्याएँ दूर हो जाती हैं जैसे रूसी, खुजली, लाल दानें, त्वचा संक्रमण आदि में नीम का रस या नीम का तेल दोनों ही प्रभावी होते हैं. यहाँ तक कि आज भी इस पौधे की पत्तियों का प्रयोग त्वचा और बालों के कई आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इससे आपको इस औषधीय पौधे के सर्वश्रेष्ठ गुणों का लाभ प्राप्त होता है। नीम त्वचा की ज्यादातर समस्याओं का हल निकालने में काफी प्रभावी साबित होता है, क्योंकि इसमें एंटी बैक्टीरियल और एंटी…

मधुमेह : आज के आधुनिक रहन सहन का अभिशाप

आजकल मधुमेह रोग काफी प्रचलित हो गया है इसके क्या कारण हैं ? मधुमेह आजकल के सर्वाधिक प्रचलित रोगों में से एक है । बहुत से लोग इसे आधुनिक सभ्यता का अभिशाप कहते हैं। अमेरिका में इसे मृत्यु का आठवां और अंधेपन का तीसरा सबसे बड़ा कारण माना गया है। यही नहीं ये आंकड़े भयावह ढंग से बढ़ रहे हैं और इनके बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण रहन-सहन की हमारी आदतों में हो रहा बदलाव है आजकल पहले से कहीं अधिक संख्या में युवक और यहाँ तक गए की बच्चे भी मधुमेह से ग्रस्त दिखायी देते हैं। निश्चित रूप से इसका एक बड़ा कारण पिछले 4-5 दशकों में श्वेत शर्करा, मैदा तथा ओजहीन खाद्य उत्पादों का हमारे द्वारा किये जाने वाला व्यापक प्रयोग माना जा सकता है। जनवरी, 2004 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में “डायबिटीज और रिह्यूमेटोलोजी” पर आधारित सेमिनार में डायबिटीज पर संस्थान द्वारा किए गए शोध का हवाला देते हुए बताया गया कि 14 से 25 साल की उम्र के लोगों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। कारण है मोटापा और आरामतलब लाइफ स्टाइल। स्कूलों में पिज्जा, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स के ज्यादा इस्तेमाल के साथ आम खान- पान में रिफाइंड खाना, पालिश किए गए…

इमली के औषधीय गुण

गुणों से भरपूर ईमली भारत में सभी गांवों में खूब ऊंचे, हरे-भरे फली से लदे झाड़ नजर आते है, जो 70-80 फुट तक ऊंचे रहते हैं। चारों ओर इसकी टहनियां होती है। इसके पत्ते हरे, छोटे और संयुक्त प्रकार के होते हैं। ये पत्ते खाने में खट्टे होते हैं। इसके पत्ते और फूल एक ही समय में आते हैं, इनसे झाड़ों की रौनक और भी बढ़ जाती है। इसकी झाड़ लंबी अवधि का दीर्घायु होती है। इसके सभी भागों का औषधि के रूप में उपयोग होता है। इमली का फल कच्चा हरा, पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है। पकी इमली का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। इसे खाने के बाद दांत तक खट्टे होने लगते हैं। एक इमली के फल में तीन से लेकर दस बीज निकलते हैं। ये बीज काले, चमकदार व बहुत कड़े होते हैं। पकी इमली का प्रयोग खट्टी सब्जी के लिये करते है। इसकी चटनी भी बनाते हैं। इससे सब्जी स्वादिष्ट बन जाती है। एक साल पुरानी इमली के गुण अधिक होते हैं। कच्ची तथा नयी पकी इमली कम गुणकारी होती है। कच्ची इमली खट्टी, भारी व वायुनाशक होती है। पकी इमली एसीडिटी कम करने वाली, कान्स्टीपेशन दूर करने वाली, गर्म तासीर वाली, कफ…

सौ रोगों की एक दवाई अदरक

अदरक के गुणकारी औषधीय लक्षण अदरक को आयुर्वेद में गुणों की खान कहा जाता है। छोटे से दिखने वाले इस आयुर्वेदिक  औषधि में कई सारे गुण समाहिता है।आयुर्वेद शास्त्र में अदरक कई बीमारियों की एक दवा कहा जाता है ।इन दिनों मौसम में परिवर्तन आ रहा है, ठण्ड ने अपना दस्तक देना शुरू कर दिया है, ठण्ड के दिनों में अदरक का सेवन सर्दी जुकाम जैसी  समस्याओं के लिए रामबाण औषधि है। सर्दी-जुकाम में अदरक के कारगर होने की बात सुनी होगी, लेकिन नए वैज्ञानिक शोध के मुताबिक अदरक मधुमेह की समस्या में भी कारगर साबित होती है। इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले एंटी कैंसर तत्व कैंसर के खतरे भी कम करते हैं। यह गर्म, तीक्ष्ण, भारी, पाक में मधुर, भूख बढ़ाने वाला, पाचक, चरपरा, रुचिकारक, त्रिदोष मुक्त यानी वात, पित्त और कफ नाशक होता है। गंभीर बीमारियों में उपयोगिता अदरक को जो किसी न किसी रूप में सेवन करता है वह हृदय रोग से दूर रहता है। अदरक शुगर तथा डायबिटीस को कंट्रोल करती है। अदरक, नींबू, सेंधा नमक मिलाकर खाने से, हमें कैंसर से बचाता है। जुकाम से, नाक बंद हो जाये, टॉन्सिल, बहरापन तथा कान बहने जैसे रोगों में अदरक का सेवन करें। इसी प्रकार अदरक…

अंगदान महादान 

एक अंग (organ) क्या है? अंग शरीर का एक हिस्सा है जो एक विशिष्ट प्रकार का कार्य करता है: जैसे आपका हृदय, फेफड़े, गुर्दे, यकृत आदि। किन अंगों का दान किया जा सकता हैं? इन अंगों का दान किया जा सकता हैं : यकृत, गुर्दे, अग्न्याशय, हृदय, फेफड़े, आंत। ऊतक (Tissue) क्या है? ऊतक एक कोशिका समूह है जो मानव शरीर में एक विशेष कार्य करता है। इसके उदाहरण हड्डी, त्वचा, आंख की कॉर्निया, हृदय वाल्व, रक्त वाहिकाएं, नस और कण्डरा आदि हैं। किन ऊतकों का दान किया जा सकता हैं? इन ऊतकों का दान किया जा सकता हैं : कॉर्निया, हड्डी, त्वचा, हृदय वाल्व, रक्त वाहिकाएं, नस और कण्डरा आदि। अंग दान क्या है? अंग दान एक व्यक्ति को बीमारी के अंतिम चरण में और अंग प्रत्यारोपण की जरूरत होने पर एक अंग का उपहार देना है। अंग दान दो प्रकार के होते हैं? अंग दान के दो प्रकार के होते हैं: – i) जीवित दाता द्वारा अंग दान : अपने जीवन के दौरान एक व्यक्ति एक गुर्दा दान कर सकता है (उसका दूसरा गुर्दा दाता के लिए पर्याप्त रूप से शरीर के कार्यों को बनाए रखने में सक्षम होना चाहिए), अग्न्याशय का हिस्साक (अग्न्याशय का आधा हिस्सा अग्नाशय के कार्यों…

घर और परिवेश में मच्छरों से छुटकारा पाने के प्राकृतिक तरीके

मच्छरों के सामान्य स्रोत अब तक हमने मच्छरों के कारणों और स्रोतों को देखा है। हमें उन चीजों को ध्यान में रखना चाहिए जो मच्छरों को पनपने में सहायक हैं जैसा कि हम जानते हैं मच्छर स्थिर पानी में निवास करतें हैं । घर और आस – पास के सभी क्षेत्रों में अभी से एकत्रित पानी को साफ करना महत्वपूर्ण है। रसोई क्षेत्र कूड़ादान और बेसिन को साफ और सुव्यवस्थित रखा जाना चाहिए। मच्छरों को कुछ सुगंध आकर्षित करते हैं, इसलिए हमेशा इत्र की बोतलों को बंद रखने के लिए सलाह दी जाती है। अमेरिकी पत्रिका द्वारा आयोजित एक अध्ययन से पता चलता है कि मच्छरों को बियर की बोतलें भी आकर्षित करती हैं। कार्बनिक कीटनाशक को फॉगर्स की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन अंतिम परिणाम उनकी प्रभावशीलता पर निर्भर करता है। इसलिए कुछ मामलों में जहां मच्छर उपद्रव अत्यधिक होता है, जैविक कीटनाशक उपयोगी साबित नहीं हो सकते हैं। स्वच्छ वातावरण स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण को प्रोत्साहित करता है। बीमारियों दूर रहती हैं। मच्छरों की वजह से मलेरिया, डेंगू, चिकन गिनी जैसे कई जीवन क्षति वाले रोग हैं। इन रोगों से बचने के लिए अत्यंत सावधानी बरतने की आवश्यकता है और मच्छरों से छुटकारा पाना जरुरी भी…
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